*जर्मनी के 1200,इटली के 1060 टन,फ्रांस कतार में...युद्ध के बीच अमेरिका के तहखाने से सोना निकालने की मची होड़, ट्रंप फिर बने विलेन?*
*वेनेजुएला के सिटिंग राष्ट्रपति को उठाने के बाद अमेरिका ने अपने चिर परिचित अंदाज में देश का खजाना लूटना शुरू कर दिया है.*
* इस खजाने को छुपाने के लिए अमेरिका ने खाड़ी के एक मुस्लिम देश को चुना है.
* अमेरिका ने दक्षिण अमेरिकी देश के 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर के कच्चे तेल की बिक्री की थी.
* ये खजाना ट्रंप ने अमेरिका नहीं बल्कि एक दूसरे देश में शिफ्ट करने का फैसला किया.
*वेनेजुएला के तेल से होने वाली कमाई को कतर के बैंक खाते में रखने का फैसला राजनीति चाल तो है ही लेकिन ट्रंप ने इसके एक और खेल खेल दिया है.*
*फ्रांस ने एक तीर से किए दो शिकार, डोनाल्ड ट्रंप की तिजोरी से खाली किया 129 टन सोना, खजाने में आए ₹1,373,312,000,000*
● अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद से यूरोपीय देशों के साथ उसकी दूरी बढ़ती जा रही है.
● टैरिफ, ग्रीनलैंड और ईरान युद्ध पर ट्रंप के फैसलों ने दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ा दी है.
● यूरोपीय देश, अब अमेरिका पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं.
● इसी का नतीजा है कि वो यूरोपीय देश न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व बैंक के गोल्ड वॉल्ट में रखा अपना सोना निकाल रहे हैं.
● जर्मनी पहले से ही इस ओर बढ़ चुका है. उससे पहले फ्रांस ने अमेरिका को बड़ा झटका दे दिया.
● फ्रांस ने अमेरिका की तिजोरी में रखा अपना 129 टन सोना बेच दिया है.
● सबसे खास बात कि उसने जितना सोना बेचा, उतना ही सोना उसकी तिजोरी में पहुंच भी गया और 12.8 अरब यूरो का मुनाफा भी कमा लिया.
*अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद से यूरोपीय देशों में अपना सोना अमेरिका से निकालने की होड़ लग गई है. इस कतार में जर्मनी सबसे आगे है.*
◆ अमेरिका के पास सिर्फ अपना ही सोना नहीं बल्कि उसके तहखाने में 30 से ज्यादा देशों की सोने की सिल्लियां रखी हुई हैं.
◆ ये सोना अमेरिका का नहीं है, वो सिर्फ इन गोल्ड का चौकीदार है. लेकिन अब इस चौकीदार पर से भरोसा उठ रहा है.
◆ अमेरिकी सत्ता में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी और उनके विवादित फैसलों ने अमेरिका पर भरोसा कम कर दिया है. यही वजह है कि अब ये देश अपना सोना अमेरिका से वापस चाहते हैं ?
◆ दुनिया के दूसरे सबसे बड़े गोल्ड रिजर्व वाले देश जर्मनी का करीब 37 फीसदी या 1236 टन सोना अमेरिका के तहखाने में रखा है, जिसकी वैल्यू 128 अरब डॉलर से अधिक है.
◆ जर्मनी के अलावा इटली का 1060 टन, नीदरलैंड्स का 190 टन सोना अमेरिका की तिजोरी में रखा है.
◆ वहीं फ्रांस, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड, लेबनान यहां तक कि आईएमएफ (IMF) जैसे संगठनों ने भी अपना सोना अमेरिका के तहखाने में जमा करके रखा है.
◆ अमेरिका के सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व के पास 30 से अधिक देशों का सोना सुरक्षित रखा है.
◆ सिर्फ अमेरिका ही नहीं ब्रिटेन का बैंक ऑफ इंग्लैंड के पास करीब 400000 गोल्ड बार को रिजर्व हैं.
◆ ये सवाल अक्सर उठता है कि आखिर ये देश अपना सोना अपनी तिजोरी में क्यों नहीं रखते हैं ? क्या उसके पास सोना रखने की जगह नहीं है ? क्या अपने देश में उनका सोना सुरक्षित नहीं है ? ऐसा बिल्कुल नहीं है, विदेशों में सोना रखने के पीछे कई कारण हैं.
◆ सिर्फ खजाना लूटने का डर नहीं, बल्कि सोने की सुरक्षा को लेकर भी यूरोपीय देशों का भरोसा अमेरिका पर बढ़ता रहा. वहीं न्यूयॉर्क वैश्विक व्यापार का का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका था, जहां सोना होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड में लेनदेन करना आसान था. इन गोल्ड रिजर्व के लिए उन्हें ना तो भारी भरकम किराया चुकाना पड़ता था और ना ही उसकी सुरक्षा के लिए माथापच्ची करने की जरूरत थी.
*सब ठीक था, लेकिन अमेरिका में ट्रंप की वापसी और बदलते वैश्विक समीकरणों ने सीन बदल दिया है. अब ये देश अमेरिका से अपना सोना वापस निकालना चाहते हैं. जर्मनी ने तो शुरूआत भी कर दी है. भारत ब्रिटेन से अपना कुछ टन सोना वापस ला भी चुका है.*
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