*, स्वस्थ रहने के 15 नियम हैं!*
*भोजन करने के 1. 30 घंटे बाद ही, पानी पीना चाहिए।*
*पानी घूँट घूँट करके पीना है। जिससे अपनी मुँह की लार पानी के साथ मिलकर, पेट में जा सके। पेट में Acid बनता है और मुँह में छार, दोनो पेट में बराबर मिल जाए तो, कोई रोग पास नहीं आएगा।*
*पानी कभी भी ठंडा (फ़्रिज़ का) नहीं पीना है।*
*सुबह उठते ही बिना क़ुल्ला किए, 2 ग्लास पानी पीना चाहिए।रात भर, जो अपने मुँह में लार है, वो अमूल्य है, उसको पेट में ही जाना ही चाहिए।*
*भोजन को, जितने मुँह में दाँत है, उतनी बार ही चबाना है।*
*भोजन ज़मीन में , पलोथी मुद्रा में बैठकर या उखड़ूँ बैठकर ही करना चाहिए।*
*भोजन के मेन्यू में, एक - दूसरे के विरोधी भोजन, एक साथ ना करे । जैसे - दूध के साथ, दही - प्याज़ के साथ, दूध - दही के साथ उड़द की दाल।*
*समुद्री नमक के स्थान पर, सेंधा नमक या काला नमक खाना चाहिए।*
*रीफ़ाइन तेल, डालडा ज़हर के समान है। इसके स्थान पर, सरसों , तिल, मूँगफली या नारियल का तेल उपयोग में लाए। सोयाबीन का, कोई भी उत्पाद भोजन में ना ले, इसके उत्पाद को केवल सुअर पचा सकते है।आदमी में, इसको पचाने के एंज़िम नहीं बनते हैं।चाहिए।*
*दोपहर के भोजन के बाद, कम से कम 30 मिनट आराम करना चाहिए और शाम के भोजन बाद, 500 क़दम पैदल चलना चाहिए।*
*घर में चीनी (शुगर) का उपयोग नहीं होना चाहिए ।क्योंकि, चीनी को सफ़ेद करने में, 17 प्रकार के विष (केमिकल ) मिलाने पड़ते है। इसके स्थान पर, गुड़ का उपयोग करना चाहिए और आज कल गुड़ बनाने में कॉस्टिक सोडा (विष) मिलाकर, गुड को सफ़ेद किया जाता है। इसलिए सफ़ेद गुड़ ना खाए। प्राकृतिक गुड़ ही खाये। प्राकृतिक गुड़ चाकलेट कलर का होता है।*
*सोते समय, आपका सिर पूर्व या दक्षिण की तरफ़ होना चाहिए।*
*घर में, कोई भी अलूमिनियम के बर्तन या कुकर नहीं होना चाहिए। हमारे बर्तन मिट्टी, पीतल, लोहा और काँसे के होने चाहिए।*
*दोपहर का भोजन 11 बजे तक अवश्य कर लें और शाम का भोजन, सूर्यास्त तक हो जाना चाहिए।*
*सुबह भोर के समय तक, आपको देशी गाय के दूध से बनी छाछ ( सेंधा नमक और ज़ीरा बिना भुना हुआ मिलाकर) पीना चाहिए!*
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